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1 Mar 2024 · 1 min read

कांटें हों कैक्टस के

कांटें हों कैक्टस के
या हो टूटे कांच के टुकड़े
चुभन इनकी
है बर्दाश्त के काबिल
ज़ख़्म आपकी बेवफ़ाई का
नाक़ाबिले बरदाश्त है

………. अतुल “कृष्ण”

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