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3 Feb 2023 · 1 min read

कतार (कुंडलिया)

कतार (कुंडलिया)
_________________________________
जाने को जग से लगी , सबकी एक कतार
अपनी बारी जा रहे , सभी छोड़ घर-बार
सभी छोड़ घर-बार , सुनिश्चित सबको जाना
यही सनातन सत्य , सदा जाना – पहचाना
कहते रवि कविराय ,मरण-तिथि है आने को
बूढ़ा तन तैयार , किंतु है कब जाने को
_________________________________
कतार = पंक्ति ,क्रम ,सिलसिला
_________________________________
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

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