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13 Jan 2024 · 1 min read

कछु मतिहीन भए करतारी,

कछु मतिहीन भए करतारी,
राम विरोध करहिं दरबारी ।
नहिं कछु सूझत उन्हहिं गोसाई,
करहिं विरोध नहाइ नहाई ।

✍️ अरविन्द त्रिवेदी

1 Like · 85 Views
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