Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 Feb 2024 · 1 min read

ओ मेरी सोलमेट जन्मों से – संदीप ठाकुर

ओ मेरी सोलमेट जन्मों से
है तू ही फेवरेट जन्मों से
इस जन्म में तो मेरी हो जाना
कर रहा हूं मैं वेट जन्मों से
संदीप ठाकुर

41 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*विश्व योग का दिन पावन, इक्कीस जून को आता(गीत)*
*विश्व योग का दिन पावन, इक्कीस जून को आता(गीत)*
Ravi Prakash
2969.*पूर्णिका*
2969.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
राखी की यह डोर।
राखी की यह डोर।
Anil Mishra Prahari
बाल कविता : बादल
बाल कविता : बादल
Rajesh Kumar Arjun
💐अज्ञात के प्रति-8💐
💐अज्ञात के प्रति-8💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
!! बोलो कौन !!
!! बोलो कौन !!
Chunnu Lal Gupta
आपके आसपास
आपके आसपास
Dr.Rashmi Mishra
"मैं आज़ाद हो गया"
Lohit Tamta
हर मंदिर में दीप जलेगा
हर मंदिर में दीप जलेगा
Ansh
इक दिन चंदा मामा बोले ,मेरी प्यारी प्यारी नानी
इक दिन चंदा मामा बोले ,मेरी प्यारी प्यारी नानी
Dr Archana Gupta
गर भिन्नता स्वीकार ना हो
गर भिन्नता स्वीकार ना हो
AJAY AMITABH SUMAN
वक्त बर्बाद करने वाले को एक दिन वक्त बर्बाद करके छोड़ता है।
वक्त बर्बाद करने वाले को एक दिन वक्त बर्बाद करके छोड़ता है।
Paras Nath Jha
यहाँ प्रयाग न गंगासागर,
यहाँ प्रयाग न गंगासागर,
Anil chobisa
प्रश्न –उत्तर
प्रश्न –उत्तर
Dr.Priya Soni Khare
फितरत
फितरत
Kanchan Khanna
हो तेरी ज़िद
हो तेरी ज़िद
Dr fauzia Naseem shad
सरस्वती वंदना-3
सरस्वती वंदना-3
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
जीवन में सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मैं स्वयं को मानती हूँ
जीवन में सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मैं स्वयं को मानती हूँ
ruby kumari
ये नयी सभ्यता हमारी है
ये नयी सभ्यता हमारी है
Shweta Soni
हज़ारों साल
हज़ारों साल
abhishek rajak
हम
हम
Dr. Pradeep Kumar Sharma
सलाम
सलाम
Dr.S.P. Gautam
गुजार दिया जो वक्त
गुजार दिया जो वक्त
Sangeeta Beniwal
झील किनारे
झील किनारे
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
सच यह गीत मैंने लिखा है
सच यह गीत मैंने लिखा है
gurudeenverma198
असली परवाह
असली परवाह
*Author प्रणय प्रभात*
वक्त
वक्त
लक्ष्मी सिंह
किस गुस्ताखी की जमाना सजा देता है..
किस गुस्ताखी की जमाना सजा देता है..
कवि दीपक बवेजा
तुम अपने धुन पर नाचो
तुम अपने धुन पर नाचो
DrLakshman Jha Parimal
क्यूं हो शामिल ,प्यासों मैं हम भी //
क्यूं हो शामिल ,प्यासों मैं हम भी //
गुप्तरत्न
Loading...