Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 Mar 2024 · 1 min read

उफ्फ्फ

उफ्फ्फ
जो गुलाब यूँ तोड़ा
एक काँटा चुभा जोर से

बूँद लहू की चमकी
उँगलियों की पोर पर

कहा धीरे से
फूलों ने क्या बिगाड़ा
जो तोड़ा , और किया अलग
शाख से ?
—– अतुल “कृष्ण”

48 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Atul "Krishn"
View all
You may also like:
" काले सफेद की कहानी "
Dr Meenu Poonia
राख के ढेर की गर्मी
राख के ढेर की गर्मी
Atul "Krishn"
ऋण चुकाना है बलिदानों का
ऋण चुकाना है बलिदानों का
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
बोलो क्या लफड़ा है
बोलो क्या लफड़ा है
gurudeenverma198
चुनिंदा बाल कहानियाँ (पुस्तक, बाल कहानी संग्रह)
चुनिंदा बाल कहानियाँ (पुस्तक, बाल कहानी संग्रह)
Dr. Pradeep Kumar Sharma
माँ
माँ
SHAMA PARVEEN
बरसें प्रभुता-मेह...
बरसें प्रभुता-मेह...
डॉ.सीमा अग्रवाल
** मुक्तक **
** मुक्तक **
surenderpal vaidya
ये भावनाओं का भंवर है डुबो देंगी
ये भावनाओं का भंवर है डुबो देंगी
ruby kumari
दिन ढले तो ढले
दिन ढले तो ढले
Dr.Pratibha Prakash
*मौत आग का दरिया*
*मौत आग का दरिया*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
रास्ते अनेको अनेक चुन लो
रास्ते अनेको अनेक चुन लो
उमेश बैरवा
सारंग-कुंडलियाँ की समीक्षा
सारंग-कुंडलियाँ की समीक्षा
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
बेहद दौलत भरी पड़ी है।
बेहद दौलत भरी पड़ी है।
सत्य कुमार प्रेमी
मैं लिखता हूँ
मैं लिखता हूँ
DrLakshman Jha Parimal
हुकुम की नई हिदायत है
हुकुम की नई हिदायत है
Ajay Mishra
सुंदर नाता
सुंदर नाता
Dr.Priya Soni Khare
"नया साल में"
Dr. Kishan tandon kranti
हमारी समस्या का समाधान केवल हमारे पास हैl
हमारी समस्या का समाधान केवल हमारे पास हैl
Ranjeet kumar patre
I want to hug you
I want to hug you
VINOD CHAUHAN
वक्त
वक्त
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
शुभकामना संदेश
शुभकामना संदेश
Rajni kapoor
अभी तो साँसें धीमी पड़ती जाएँगी,और बेचैनियाँ बढ़ती जाएँगी
अभी तो साँसें धीमी पड़ती जाएँगी,और बेचैनियाँ बढ़ती जाएँगी
पूर्वार्थ
2802. *पूर्णिका*
2802. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मां के शब्द चित्र
मां के शब्द चित्र
Suryakant Dwivedi
Cottage house
Cottage house
Otteri Selvakumar
हम तो अपनी बात कहेंगें
हम तो अपनी बात कहेंगें
अनिल कुमार निश्छल
*पाऊँ पद हरि आपके , प्रभु जी करो विचार【भक्ति-कुंडलिया】*
*पाऊँ पद हरि आपके , प्रभु जी करो विचार【भक्ति-कुंडलिया】*
Ravi Prakash
अबोध प्रेम
अबोध प्रेम
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
" मन भी लगे बवाली "
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
Loading...