Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Jun 2023 · 1 min read

आ ठहर विश्राम कर ले।

आ ठहर विश्राम कर ले।
भार उर का कुछ तो हर ले।।
तू समझता है कि जग में,
तू ही केवल जड़ बना है।
हां यही स च मानकर,
शायद तू इतना अनमना है,
भ्रम तिमिर को दूर कर के,
ज्ञान का उजियार भर ले।
आ ठहर विश्राम कर ले।।
जो पथिक पथ पर चला ना,
विघ्न की पहचान लेकर,
लघु कंटकों ने भी गिराया,
मधुमयी पुचकार देकर,
है यही जीवन कहानी,
तू इसे स्वीकार कर ले।
आ ठहर विश्राम कर ले।।
दूर कर अवरोध को,
तत्क्षण सहज गतिमान होकर,
हर निराशा तंतु में,
नव आस के मोती पिरोकर,
जिंदगी की सौम्य ग्रीवा में,
सुनहरा हार धर ले।
आ ठहर विश्राम कर ले।।
जटिल हो कर भी लचीला,
जो तरल जल सा बना है,
सार्थक जीवन जिया,
प्रतिमान भी ऊंचे गढ़ा है,
त्याज्य गुण होता कहां है?
रूप चाहे जो भी धर ले।
आ ठहर विश्राम कर ले।।
सरोज यादव

2 Likes · 358 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
हमें यह ज्ञात है, आभास है
हमें यह ज्ञात है, आभास है
DrLakshman Jha Parimal
कोई गुरबत
कोई गुरबत
Dr fauzia Naseem shad
"सुर्खियाँ"
Dr. Kishan tandon kranti
नारियां
नारियां
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
एक अकेला रिश्ता
एक अकेला रिश्ता
विजय कुमार अग्रवाल
जीवन में जीत से ज्यादा सीख हार से मिलती है।
जीवन में जीत से ज्यादा सीख हार से मिलती है।
Dr. Pradeep Kumar Sharma
नन्ही मिष्ठी
नन्ही मिष्ठी
Manu Vashistha
*** एक दौर....!!! ***
*** एक दौर....!!! ***
VEDANTA PATEL
*दायरे*
*दायरे*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
Man has only one other option in their life....
Man has only one other option in their life....
सिद्धार्थ गोरखपुरी
तुमको खोकर इस तरहां यहाँ
तुमको खोकर इस तरहां यहाँ
gurudeenverma198
हर दर्द से था वाकिफ हर रोज़ मर रहा हूं ।
हर दर्द से था वाकिफ हर रोज़ मर रहा हूं ।
Phool gufran
एक गुजारिश तुझसे है
एक गुजारिश तुझसे है
Buddha Prakash
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
लौह पुरुष - दीपक नीलपदम्
लौह पुरुष - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
किसी भी चीज़ की आशा में गवाँ मत आज को देना
किसी भी चीज़ की आशा में गवाँ मत आज को देना
आर.एस. 'प्रीतम'
#लघुकथा-
#लघुकथा-
*Author प्रणय प्रभात*
आम्बेडकर ने पहली बार
आम्बेडकर ने पहली बार
Dr MusafiR BaithA
मां - हरवंश हृदय
मां - हरवंश हृदय
हरवंश हृदय
मोहब्बत और मयकशी में
मोहब्बत और मयकशी में
शेखर सिंह
ॐ
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
सफलता का लक्ष्य
सफलता का लक्ष्य
Paras Nath Jha
बेटियां
बेटियां
Mukesh Kumar Sonkar
ग्रीष्म ऋतु भाग ३
ग्रीष्म ऋतु भाग ३
Vishnu Prasad 'panchotiya'
24/250. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
24/250. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मेरे पास फ़ुरसत ही नहीं है.... नफरत करने की..
मेरे पास फ़ुरसत ही नहीं है.... नफरत करने की..
shabina. Naaz
भाव में शब्द में हम पिरो लें तुम्हें
भाव में शब्द में हम पिरो लें तुम्हें
Shweta Soni
अनन्त तक चलना होगा...!!!!
अनन्त तक चलना होगा...!!!!
Jyoti Khari
योग तराना एक गीत (विश्व योग दिवस)
योग तराना एक गीत (विश्व योग दिवस)
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
It's not always about the sweet kisses or romantic gestures.
It's not always about the sweet kisses or romantic gestures.
पूर्वार्थ
Loading...