Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 Jun 2022 · 1 min read

आज मस्ती से जीने दो

मै भला हूँ या बुरा
इसका फैसला लोगो को करने दो
मै जैसी भी हूँ मुझे
आज मस्ती से जीने दो
ढाल लेना एक साँचे में मुझे
अभी किसी को मुझे भला
किसी को मुझे बुरा कहने दो।

~अनामिका

Language: Hindi
Tag: शेर
7 Likes · 6 Comments · 332 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
Sannato me shor bhar de
Sannato me shor bhar de
Sakshi Tripathi
यूएफओ के रहस्य का अनावरण एवं उन्नत परालोक सभ्यता की संभावनाओं की खोज
यूएफओ के रहस्य का अनावरण एवं उन्नत परालोक सभ्यता की संभावनाओं की खोज
Shyam Sundar Subramanian
आपकी आहुति और देशहित
आपकी आहुति और देशहित
Mahender Singh Manu
तारों का झूमर
तारों का झूमर
Dr. Seema Varma
पानी से पानी पर लिखना
पानी से पानी पर लिखना
Ramswaroop Dinkar
जंगल का रिवाज़
जंगल का रिवाज़
Shekhar Chandra Mitra
2782. *पूर्णिका*
2782. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
सुनो तुम
सुनो तुम
Sangeeta Beniwal
दुर्लभ हुईं सात्विक विचारों की श्रृंखला
दुर्लभ हुईं सात्विक विचारों की श्रृंखला
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
काग़ज़ के पुतले बने,
काग़ज़ के पुतले बने,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मकर संक्रांति
मकर संक्रांति
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
सागर से अथाह और बेपनाह
सागर से अथाह और बेपनाह
VINOD CHAUHAN
नेक मनाओ
नेक मनाओ
gpoddarmkg
चिकने घड़े
चिकने घड़े
ओनिका सेतिया 'अनु '
रस्म
रस्म
जय लगन कुमार हैप्पी
कितना रोके मगर मुश्किल से निकल जाती है
कितना रोके मगर मुश्किल से निकल जाती है
सिद्धार्थ गोरखपुरी
*लक्ष्मण (कुंडलिया)*
*लक्ष्मण (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
भोर पुरानी हो गई
भोर पुरानी हो गई
आर एस आघात
उन यादों को
उन यादों को
Dr fauzia Naseem shad
ग्वालियर, ग्वालियर, तू कला का शहर,तेरी भव्यता का कोई सानी नह
ग्वालियर, ग्वालियर, तू कला का शहर,तेरी भव्यता का कोई सानी नह
पूर्वार्थ
बगावत की बात
बगावत की बात
AJAY PRASAD
स्वदेशी
स्वदेशी
विजय कुमार अग्रवाल
■ बेशर्म सियासत दिल्ली की।।
■ बेशर्म सियासत दिल्ली की।।
*Author प्रणय प्रभात*
प्रभु रामलला , फिर मुस्काये!
प्रभु रामलला , फिर मुस्काये!
Kuldeep mishra (KD)
उफ़ ये अदा
उफ़ ये अदा
Surinder blackpen
"पतवार बन"
Dr. Kishan tandon kranti
मीठी जलेबी
मीठी जलेबी
rekha mohan
*
*"बापू जी"*
Shashi kala vyas
मनवा नाचन लागे
मनवा नाचन लागे
मनोज कर्ण
जितना बर्बाद करने पे आया है तू
जितना बर्बाद करने पे आया है तू
कवि दीपक बवेजा
Loading...