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30 Sep 2016 · 1 min read

आज के गीत

~~~~~~कुण्डलिया छंद~~~~~~

सुनते राम भजन सभी,,,हो जाते हैं बोर
चिकनि-चमेली धून पे, होते भावविभोर।
होते भावविभोर,,,,सभी को नाच-नचाते
होता है हुड़दंग,,,,,,,जोर से साँग बजाते।
कह महंत कविराय,,,,,,गीत बेढंगे चुनते
बेढब थिरका करें,,,साँग जब ऐसे बजते।।

“साँग” – रिमिक्स गाने के लिए प्रयोग

बी0 आर0 महंत

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