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27 Apr 2023 · 1 min read

“अहङ्कारी स एव भवति यः सङ्घर्षं विना हि सर्वं लभते।

“अहङ्कारी स एव भवति यः सङ्घर्षं विना हि सर्वं लभते।
येन स्वपरिश्रमेण लब्धं सर्वं
सः एव अन्येषां परिश्रमफलं सम्मन्यते।”

— ( अहंकारी वही होता है जो संघर्ष के बिना ही सब प्राप्त कर लेता है, जो स्वपरिश्रम से प्राप्त करता है वह अन्यों के परिश्रम फल को भी सम्मान देता है। )

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