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2 Dec 2022 · 1 min read

*अभी भी याद आते हैं, बरातों वाले दिन साहिब(मुक्तक)*

*अभी भी याद आते हैं, बरातों वाले दिन साहिब(मुक्तक)*
_______________________
अभी भी याद आते हैं, बरातों वाले दिन साहिब
ठहरने वाले जनवासों में, रातों वाले दिन साहिब
वह नखरे-गुस्सा-फरमाइश, अहा ! क्या दौर चलता था
कहॉं वह खो गए खट्मीठी, बातों वाले दिन साहिब
—————————————-
*रचयिता: रवि प्रकाश*
बाजार सर्राफा ,रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
27 Views

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