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11 Apr 2018 · 1 min read

अभिव्यक्ति

मैं पीर पराई कैसे जानूँ,
जब मैंने सौ-सौ नीर बहाये है।
पग-पग काँटे हरपल शोले,
दुनिया ने मेरे कदमों तले बिछाये है।

Language: Hindi
338 Views
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