Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Jan 2023 · 1 min read

अपनी क़िस्मत को

अपनी क़िस्मत को हम कहां रखते ।
कैसे कोई उम्मीद-ए- दर खुला रखते ।।

डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Language: Hindi
Tag: शेर
11 Likes · 200 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr fauzia Naseem shad
View all
You may also like:
महावीर उत्तरांचली आप सभी के प्रिय कवि
महावीर उत्तरांचली आप सभी के प्रिय कवि
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
भाई दोज
भाई दोज
Ram Krishan Rastogi
पतझड़
पतझड़
ओसमणी साहू 'ओश'
गुलाब के अलग हो जाने पर
गुलाब के अलग हो जाने पर
ruby kumari
** बहुत दूर **
** बहुत दूर **
surenderpal vaidya
अब उठो पार्थ हुंकार करो,
अब उठो पार्थ हुंकार करो,
अनूप अम्बर
सोना जेवर बनता है, तप जाने के बाद।
सोना जेवर बनता है, तप जाने के बाद।
आर.एस. 'प्रीतम'
मैं भारत का जवान हूं...
मैं भारत का जवान हूं...
AMRESH KUMAR VERMA
तेरी महबूबा बनना है मुझे
तेरी महबूबा बनना है मुझे
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
विदाई
विदाई
Aman Sinha
वेलेंटाइन डे की प्रासंगिकता
वेलेंटाइन डे की प्रासंगिकता
मनोज कर्ण
लौट कर वक्त
लौट कर वक्त
Dr fauzia Naseem shad
गीत - प्रेम असिंचित जीवन के
गीत - प्रेम असिंचित जीवन के
Shivkumar Bilagrami
फकीरी
फकीरी
Sanjay ' शून्य'
ऐ ज़िंदगी।
ऐ ज़िंदगी।
Taj Mohammad
हम हिंदुओ का ही हदय
हम हिंदुओ का ही हदय
ओनिका सेतिया 'अनु '
तेरे ख़त
तेरे ख़त
Surinder blackpen
सत्य कहाँ ?
सत्य कहाँ ?
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
महफ़िल से जाम से
महफ़िल से जाम से
Satish Srijan
"वंशवाद की अमरबेल" का
*Author प्रणय प्रभात*
मेरी पेशानी पे तुम्हारा अक्स देखकर लोग,
मेरी पेशानी पे तुम्हारा अक्स देखकर लोग,
Shreedhar
छोड़ चली तू छोड़ चली
छोड़ चली तू छोड़ चली
gurudeenverma198
ग़ज़ल सगीर
ग़ज़ल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
पल पल का अस्तित्व
पल पल का अस्तित्व
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
शिव ही बनाते हैं मधुमय जीवन
शिव ही बनाते हैं मधुमय जीवन
कवि रमेशराज
सेल्फी या सेल्फिश
सेल्फी या सेल्फिश
Dr. Pradeep Kumar Sharma
@ !!
@ !! "हिम्मत की डोर" !!•••••®:
Prakhar Shukla
*होली किस दिन को मने, सबसे बड़ा सवाल (हास्य कुंडलिया)*
*होली किस दिन को मने, सबसे बड़ा सवाल (हास्य कुंडलिया)*
Ravi Prakash
2563.पूर्णिका
2563.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
*यार के पैर  जहाँ पर वहाँ  जन्नत है*
*यार के पैर जहाँ पर वहाँ जन्नत है*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
Loading...