Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 Nov 2022 · 1 min read

अनकहे अल्फाज़

अपनी तन्हाई में मैं तन्हा अच्छी थी
जरुरत नहीं थी मुझे किसी सहारे की
ठोकरे खाकर सोचा
के थोड़ा संभल जाती हूं अब
लेकिन, मुमकिन नहीं
बिन तुम्हारे ये जिंदगी गुजारना

चाहना कोई बड़ी बात नहीं
लेकिन…,
तुम्हारा चाहना खुशनसीबी मेरी

एक वक़्त था जब कमरे में मेरे
किताबों के सिवा कुछ भी नहीं था
आज किताबों के हर पन्ने में
तुमको हूं मैं पिरोती
कभी गजलों में, कभी अल्फाज़ों में
कभी डायरी के पन्नों में
रातें सच्ची, दिन झूठे से लगते है
दिन के उजाले रात बहकाने से लगते है

नागंवारा थी कभी बहारें जो मुझे
आज बिखरी है वहां खुशबूएं गुलों की
तमन्ना है कई आज दिल में मेरे

रूठी मेरी बेरंगी दुनियां का
उजला सवेरा हो तुम
मेरी तक़्दीर का लिखा
एक बेहतरीन हसीं ख्वाब हो तुम

देखू जब भी मैं आईना
तो तुम ही नज़र आते हो
मिलकर तुमसे ऐसा लगा
जैसे! सदियों से मेरे साथ हो
जैसे! मेरा ही अक्स हो तुम

घटती जा रही है सासें
पल-२ गुज़रता जा रहा है ये वक़्त
फिर, भी जीते जा रहे है सब
लम्हों की यादें संजोए हुए

तसव्वुर ये तुम्हारा सिर्फ़ तुम्हारा नहीं है
बन चुका है अब ये ताबिर मेरी भी।
~ Silent Eyes

5 Likes · 1 Comment · 309 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
बरसात (विरह)
बरसात (विरह)
लक्ष्मी सिंह
#शर्माजीकेशब्द
#शर्माजीकेशब्द
pravin sharma
कभी कभी किसी व्यक्ति(( इंसान))से इतना लगाव हो जाता है
कभी कभी किसी व्यक्ति(( इंसान))से इतना लगाव हो जाता है
Rituraj shivem verma
#शेर-
#शेर-
*Author प्रणय प्रभात*
माँ के बिना घर आंगन अच्छा नही लगता
माँ के बिना घर आंगन अच्छा नही लगता
Basant Bhagawan Roy
*रामदेव जी धन्य तुम (नौ दोहे)*
*रामदेव जी धन्य तुम (नौ दोहे)*
Ravi Prakash
कुछ नहीं बचेगा
कुछ नहीं बचेगा
Akash Agam
I got forever addicted.
I got forever addicted.
Manisha Manjari
अतीत
अतीत
Shyam Sundar Subramanian
"शख्सियत"
Dr. Kishan tandon kranti
विद्याधन
विद्याधन
Dr. Pradeep Kumar Sharma
यहाँ प्रयाग न गंगासागर,
यहाँ प्रयाग न गंगासागर,
Anil chobisa
*एकांत*
*एकांत*
जगदीश लववंशी
गंगा से है प्रेमभाव गर
गंगा से है प्रेमभाव गर
VINOD CHAUHAN
हुनर है झुकने का जिसमें दरक नहीं पाता
हुनर है झुकने का जिसमें दरक नहीं पाता
Anis Shah
11) “कोरोना एक सबक़”
11) “कोरोना एक सबक़”
Sapna Arora
3328.⚘ *पूर्णिका* ⚘
3328.⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
.....,
.....,
शेखर सिंह
उम्मीद ....
उम्मीद ....
sushil sarna
तुम वादा करो, मैं निभाता हूँ।
तुम वादा करो, मैं निभाता हूँ।
अजहर अली (An Explorer of Life)
खुद ही खुद से इश्क कर, खुद ही खुद को जान।
खुद ही खुद से इश्क कर, खुद ही खुद को जान।
विमला महरिया मौज
नदी किनारे
नदी किनारे
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
प्रेम हैं अनन्त उनमें
प्रेम हैं अनन्त उनमें
The_dk_poetry
अपने आसपास
अपने आसपास "काम करने" वालों की कद्र करना सीखें...
Radhakishan R. Mundhra
दोहा-प्रहार
दोहा-प्रहार
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
फितरत के रंग
फितरत के रंग
प्रदीप कुमार गुप्ता
बिटिया विदा हो गई
बिटिया विदा हो गई
नवीन जोशी 'नवल'
जालोर के वीर वीरमदेव
जालोर के वीर वीरमदेव
Shankar N aanjna
सम्मान
सम्मान
Paras Nath Jha
सिंदूर..
सिंदूर..
Ranjeet kumar patre
Loading...