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6 Apr 2024 · 2 min read

*अध्याय 3*

अध्याय 3
दत्तक पुत्र की कामना

दोहा

सोचो तो कैसे हुआ, अद्भुत एक कमाल
कृष्ण कन्हैया पा गए, निर्मल मन नॅंदलाल
—————————————-
1)
दो ही वर्षों बाद पुत्र रुक्मिणि ने दूजा पाया
यह थे राम प्रकाश देख नाना का मन ललचाया
2)
सोचा राम प्रकाश अगर मेरे घर रहने आए
पल में मेरा घर सूना जो खुशियों से भर जाए
3)
मेरा घर तो सदा काटने-खाने को रहता है
जहॉं नहीं बालक उस घर को कोई घर कहता है
4)
बालक राम प्रकाश अगर मेरे घर में आता है
बरसेगा आनंद परम यह बालक ही दाता है
5)
इस भॉंति सोच कर मन ही मन थे भीतर तक हर्षाते
सुंदर लाल स्वप्न में सुंदर डूब-डूब फिर जाते
6)
किंतु सोचते दूजे ही पल रुक्मिणि इसे न देगी
वह है उसका पुत्र भला मॉं से नानी क्या लेगी
7)
फिर मन में आता विचार कहना न कभी टालेगी
रुक्मिणि बेटी से बढ़कर मेरी इच्छा पालेगी
8)
अगर कहूंगा मैं रुक्मिणि से मुझे सौंप जाएगी
बेटा राम प्रकाश गोद में वह मेरे लाएगी
9)
मॉं को सुत से बड़ा नहीं होता दुनिया में कोई
किंतु न ताऊ को टालेगी वह है मुझ में खोई
10)
मैंने रुक्मिणि बड़े चाव से लाड़-प्यार से पाली
कभी नहीं इच्छा उसकी जिद उसकी कभी न टाली
11)
बड़ा पुत्र दो वर्ष आयु का उसके पास रहेगा
मैं केवल छोटे को लूंगा ताऊ मुझे कहेगा
12)
बड़े पुत्र से रुक्मिणि के घर में खुशियॉं बरसेंगी
और पुत्र को प्यासी मेरी नजरें कब तरसेंगी
13)
पाकर इसे गिंदौड़ी देवी का मन कुछ बहलेगा
नन्हा राम प्रकाश गोद में जब उसके खेलेगा
14)
मन में आते शुभ विचार पर मन ही में रह जाते
नहीं गिंदौड़ी देवी रूक्मिणि से किंचित कह पाते
15)
मन में भय था ऊॅंट न जाने किस करवट बैठेगा
इच्छा होगी पूर्ण विनय या ईश्वर ठुकरा देगा
16)
सदा कहॉं इस जग में किसने मनवांछित पाया है
सदा कहो सौभाग्य पूर्ण कब किसके घर आया है
17)
चाह रहा जो मनुज उसे कब वस्तु कहॉं मिलती है
कली हृदय की कभी अधखिली कभी-कभी खिलती है
18)
पुण्य पूर्व जन्मों के हों तब यह बालक आएगा
राम प्रकाश पुण्य आत्मा ही कोई पाएगा
19)
होगा यदि सौभाग्य भाग्य में राम प्रकाश मिलेगा
पुण्यवान ही के घर में यह शतदल कमल खिलेगा
20)
दिन में बारंबार प्रीति से बॅंध बेटी घर जाते
सुंदरलाल गोद में ले-ले राम प्रकाश खिलाते
21)
जितनी देर खिलाते उतना ही मन बढ़ता जाता
जितनी देर रुको चाहे पर तृप्त-भाव कब आता
22)
जब भी उठते मन यह कहता अभी और रुक जाओ
मन ही मन मन कहता देरी कुछ तो और लगाओ
23)
अजब एक प्यासापन सुंदर लाल बढ़ रहा पाते
चुंबक-सा आकर्षण राम प्रकाश ले रहे आते

दोहा

जीवन-नौका चल रही, खेने वाले राम
पार मिले मॅंझधार या, पता किसे परिणाम
————————————–
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