Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Mar 2024 · 1 min read

میں ہوں تخلیق اپنے ہی رب کی ۔۔۔۔۔۔۔۔۔

میں ہوں تخلیق اپنے ہی رب کی
مجھکو مٹی شمار نہ کرنا
۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔ڈاکٹر فوزیہ نسیم شاد۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔

Language: Urdu
7 Likes · 95 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr fauzia Naseem shad
View all
You may also like:
दोहे- चार क़दम
दोहे- चार क़दम
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
The unknown road.
The unknown road.
Manisha Manjari
हमको ख़ामोश कर दिया
हमको ख़ामोश कर दिया
Dr fauzia Naseem shad
Dear me
Dear me
पूर्वार्थ
बघेली कविता -
बघेली कविता -
Priyanshu Kushwaha
6-जो सच का पैरोकार नहीं
6-जो सच का पैरोकार नहीं
Ajay Kumar Vimal
पुस्तकों की पुस्तकों में सैर
पुस्तकों की पुस्तकों में सैर
Mrs PUSHPA SHARMA {पुष्पा शर्मा अपराजिता}
वह स्त्री / MUSAFIR BAITHA
वह स्त्री / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
■ अधिकांश राजनेता और अफ़सर।।
■ अधिकांश राजनेता और अफ़सर।।
*प्रणय प्रभात*
राम का न्याय
राम का न्याय
Shashi Mahajan
भर लो नयनों में नीर
भर लो नयनों में नीर
Arti Bhadauria
माया और ब़ंम्ह
माया और ब़ंम्ह
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
तेरा वादा.
तेरा वादा.
Heera S
कुछ लोगो का दिल जीत लिया आकर इस बरसात ने
कुछ लोगो का दिल जीत लिया आकर इस बरसात ने
सिद्धार्थ गोरखपुरी
* सड़ जी नेता हुए *
* सड़ जी नेता हुए *
Mukta Rashmi
तू ही हमसफर, तू ही रास्ता, तू ही मेरी मंजिल है,
तू ही हमसफर, तू ही रास्ता, तू ही मेरी मंजिल है,
Rajesh Kumar Arjun
जुनून
जुनून
नवीन जोशी 'नवल'
दोहा छंद
दोहा छंद
Seema Garg
*मुख्य अतिथि (हास्य व्यंग्य)*
*मुख्य अतिथि (हास्य व्यंग्य)*
Ravi Prakash
आख़िरी इश्क़, प्यालों से करने दे साकी-
आख़िरी इश्क़, प्यालों से करने दे साकी-
Shreedhar
चन्द्रयान पहुँचा वहाँ,
चन्द्रयान पहुँचा वहाँ,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
"अक्सर"
Dr. Kishan tandon kranti
अब बहुत हुआ बनवास छोड़कर घर आ जाओ बनवासी।
अब बहुत हुआ बनवास छोड़कर घर आ जाओ बनवासी।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
जो बातें अनुकूल नहीं थीं
जो बातें अनुकूल नहीं थीं
Suryakant Dwivedi
तू सुन ले मेरे दिल की पुकार को
तू सुन ले मेरे दिल की पुकार को
gurudeenverma198
"प्यार में तेरे "
Pushpraj Anant
चलो कल चाय पर मुलाक़ात कर लेंगे,
चलो कल चाय पर मुलाक़ात कर लेंगे,
गुप्तरत्न
मैं तो निकला था,
मैं तो निकला था,
Dr. Man Mohan Krishna
"ऐसा है अपना रिश्ता "
Yogendra Chaturwedi
Loading...