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Author: डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
Posts 24
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देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 1000 से अधिक लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर' काव्य संग्रह मित्र प्रकाशन, कोलकाता के सहयोग से प्रकाशित। सामान्य ज्ञान दिग्दर्शन, दिल्ली : सम्पूर्ण अध्ययन, वेस्ट बंगाल : एट ए ग्लांस जैसी बहुचर्चित कृतियां 'उपकार प्रकाशन' से प्रकाशित। प्रत्येक चार माह पर समसामयिक सीरीज का लगातार प्रकाशन, 'अंचल भारती' पत्रिका का सह-सम्पादन ।मो9450017326

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मोक्ष

मोक्ष.. 'मानव की अंतिम इक्छा का, एक अबुझ पहेली, क्या 'जीवन' के [...]

गधी का दूध

गधों को गदहा कहने पर लोग मुस्करा देते हैं. ऐसे सीधे-साधे [...]

गदहे

गदहे, अब मुख़्यधारा में आ रहे हैं. वे रेंकने के बजाय, फेंकने [...]

समय

समय धन है, और संसार का मूल्यवान भी 'धन' समय को नहीं खरीद सकता [...]

नोटबंदी साठा-1

(1) नव विहान होने लगा है, पंक्तियाँ सिमटने लगी हैं, देश शीघ्र [...]

हनुमान कूद

दुश्मन को देखकर भागने से पहले हिरण एक लम्बी छलांग क्यों [...]

आतंकवाद

आतंकवाद, उफ़! धागों की तरह उलझ गए हैं लोग हिंसा के अभिनन्दन [...]

आज बहुत ठंडक है

आज जब मैं अपने गांव से गुजर रहा था एक कंकाल नंगे [...]

आदमी

मंजिलों की चाह में कफ़िलों के साथ हर पता पर रहगुजर से पूछता [...]

सातवां आसमाँ

मैं अक्सर देखता हूँ उनकी राह जो बैठे हैं सातवें आसमाँ [...]

बचपन

नहीं मालूम क्यों रखा उसका नाम चुल्लू उसके सफेद [...]

फाइव-पी समवन

फाइव-पी एक नमूना प्रति हैं. बड़े-बड़े प्रकाशक जो कुछ भी छापते [...]

आशा के दीप

सूर्य,चाँद और तारे वन, पहाड़ और झरने शीतल बयार और काले मेघ सब [...]

आवश्यकता

आवश्यकता है, एक नवयुवती की जो अधेड़ से शादी रचाये उसे [...]

फॉर्मूला-ए-चुनावी शुभकामना

चुनाव सम्पन्न होने के साथ ही राजनीति का बाजार गर्म हो जाता [...]

आधुनिक नेता

तीन यांत्रिक, एक अनपढ़ दोस्त बन गए एकाएक चारों मिल देशाटन [...]

नारी

नारी! तुम क्या हो ? कृष्ण की राधा हो, या राम की सीता, कालीदास [...]

साहब बीमार हैं

अक्सर, पद-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान और लोकप्रियता के वायरस साहब [...]

जीवन

जीवन एक सुखद सपना है, सुख-दुःख आते जाते, कहता गुलाब देखो हम [...]

क्या यही जीवन है

कभी-कभी सोचता हूँ, जीवन क्या है ? भोर हुआ पतझड़ आया सब भगे जा [...]

बापू पलट गए हैं।

विकास की नई उड़ान चरखा चलाते हमारे प्रधान बापू हट गए [...]

चल भाई दुःख दर्द बताएं

सुबह से ही झबरैला कुत्ता भौंक रहा है, मंत्री जी की नींद ख़राब [...]

सबेरा

जब मन-मस्तिष्क, सद की इक्छाओं से ओत-प्रोत हों, भावनाएं, [...]

बेटियाँ

बेटियाँ,बेटियाँ हैं जो हैं सूत्रधार सृजन की,ममत्व की- और [...]