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Author: शालिनी साहू

शालिनी साहू
Posts 43
Total Views 255

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

रह-रहकर वही बात…

अन्तर्मन को कुरेदती रही रह-रहकर वही बात! नहीं हैं भाव गहरे [...]

आदमी आदमी को खाये जा रहा है….

आदमी आदमी को खाये जा रहा है जी हाँ सरकार! यही आक्रोश दिल को [...]

शाम न हो जाए…

आ लौट चले बसेरे पर अपने सुर्ख शाम न हो जाए! उन्नींदी आँखों में [...]

सात फेरे सात वचन…..

जीवन के बन्धन मजबूत होते हैं अग्नि के फेरों संग सात फेरे सात [...]

मैं नहीं हूँ कलमकार…..

मैं नहीं हूँ कोई कलमकार बस दे देती हूँ शब्दों को आकार बिन [...]

विस्मित करता प्रभात….

प्रभात का प्रकाश विस्मित करता हर रोज नयी ऊर्जा का संचार खुल [...]

प्रिय मित्र जुगाड़….

कहीं भी हो तुम्हारे बिना सारे काम अधूरे जान पड़ते हैं! [...]

मन की मनमानी….

काव्य सृजन-97 कर लिया मन ने अाज फिर मनमानी! चिर निद्रा [...]

खिलौने का मोह…..

नहीं छोड़ पाया अपने खिलौने का मोह वो बालमन! छीना-झपटी करते [...]

वट सावित्री पूजन….

वट सावित्री... समाज की परिपाटी भी क्या खूब है हम आप मिलकर एक [...]

भारत के वीर जवानों

भारत के वीर- . हे!भारत के वीर जवानों तुम मातृभूमि की रक्षा [...]

सरकारी स्कूलों की व्यथा….

. मास्टर जी विद्यालय में बैठ बच्चों से पंखा झलवा रहे थे खुद [...]

दो किनारे रह गये…

अपनों के लिए हमेशा हारती रही! जीतने का हुनर धीरे-धीरे भूलती [...]

जब भी सुनी बात….

जब भी सुनी बात खुले वातावरण की गाँव की कल्पना मन में उभर [...]

हाइकु.. .

हाइकू- . तुम और मैं कागज की है कश्ती दूर किनारा! . पलकें [...]

प्रभु तुम ध्यान रखना.. .

हम अबोध हम नादान प्रभु तुम ध्यान रखना! . असत्य के मार्ग से [...]

दोहे….

दोहा... . कउन कहै मन के बात, कउन सुनावै तान| मन कैदी होय गा अब,जब [...]

साथ अधूरे थे.. ..

भाव भी गहरे थे राज भी सुनहरे थे बस चेहरे की रंगत फीकी पड़ गयी [...]

धर्मगुरु.. .

धर्मगुरू.......(कहानी) दिन भर की चिलचिलाती धूप के बाद शाम की [...]

मातृत्व दिवस पर माफ़ीनामा. ….

मातृत्व दिवस पर..... (माफ़ीनामा) प्यारी माँ.... माँ तो साक्षात् [...]

खुदा से मिलन के लिए.. ..

फिजाएँ भी रोक रहीं हवाओं के जरिये! मत जा तू सूना रह जायेगा [...]

हर स्त्री का सपना.. ..

माँ बनने का ये सुखद एहसास हर स्त्री के मन में होता है!नौ महीने [...]

मन बेचैन होता है…. .

मन बेचैन होता है... बात जब ह्रदय से जुड़े रिश्तों की हो तो [...]

जिन्दगी का सफर

बहुत खुशनुमा रहा ज़िन्दगी का सफर चलती रही तुम साये की तरह [...]

ये अखबार… .

समय की अहमियत बताता ये अखबार कैसे केवल एक दिन का [...]

पुराने शहर के मंजर निकलने लगते हैं!

पुराने शहर के मंजर निकलने लगते हैं आँखें जहाँ भी खुले समन्दर [...]

अपनी पीड़ा…

कब तक दबाती फिरोगी अपने दर्द की पीड़ा को इन जुल्मों को [...]

जरुरत ही क्या जख्मों को कुरेदने की…

जरूरत ही क्या उन जख्मों को फिर से कुरेदने की! जिनका [...]

मित्र की मित्रता..

तुम्हें शब्दों में परिभाषित करना आसान नहीं है मित्र! [...]

कुछ देर ठहरो.. .

कुछ देर और ठहरो अभी बातें बहुत बाकी हैं! हवा के इस रुख से [...]