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Author: शालिनी साहू

शालिनी साहू
Posts 54
Total Views 457

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

दीपक जलाते रहें…

दीप जलते रहें जगमगाते रहें हर बरस उत्सव के पल आते [...]

हिन्दी दिवस पर विशेष….

भाषा विचारों की अभिव्यक्ति है जिसके माध्यम से हम एक दूसरे के [...]

अधिकार तुम्हें था….

अधिकार तुम्हें था रुठ जाने का एक-बार नहीं सौ बार जाने का इस [...]

कब आओगे तुम…

पलकें बिछी थी कोरों पर सुवासित की झड़ी उठ रही एक तरंग मानस [...]

आफत…..

आफत... शाम का वक्त था बाजार की रौनक शुरू ही हुई थी कि मेरा [...]

सबसे बड़ा रुपइया भइया…

शव लादे कन्धों पर पाँव लड़खड़ा रहे थे नन्हीं मुन्नी हाथ पकड़ [...]

वाह-वाही करके तो देखो..

पत्नियाँ हो जाती हैं खुश बस एक बार वाहवाही करके तो [...]

कसौटी प्रेम और विश्वास की….

तुमको न भूल पायेगें.... मित्रता विशेषण ही नहीं अपने आप में [...]

दायरा…

फुँहारे पड़ी अचानक आँखों का दर्द समझूँ या बारिश का पानी! कह [...]

बता क्यूँ नहीं देते…..

एक बार ही जी भर के सजा क्यूँ नहीं देते इन रूढ़ियों, परम्पराओं [...]

ऐसी निशानी दे दी….

माँ तुमने ऐसी कहानी दे दी ज़िन्दगी भर की निशानी दे दी! [...]

रह-रहकर वही बात…

अन्तर्मन को कुरेदती रही रह-रहकर वही बात! नहीं हैं भाव गहरे [...]

आदमी आदमी को खाये जा रहा है….

आदमी आदमी को खाये जा रहा है जी हाँ सरकार! यही आक्रोश दिल को [...]

शाम न हो जाए…

आ लौट चले बसेरे पर अपने सुर्ख शाम न हो जाए! उन्नींदी आँखों में [...]

सात फेरे सात वचन…..

जीवन के बन्धन मजबूत होते हैं अग्नि के फेरों संग सात फेरे सात [...]

मैं नहीं हूँ कलमकार…..

मैं नहीं हूँ कोई कलमकार बस दे देती हूँ शब्दों को आकार बिन [...]

विस्मित करता प्रभात….

प्रभात का प्रकाश विस्मित करता हर रोज नयी ऊर्जा का संचार खुल [...]

प्रिय मित्र जुगाड़….

कहीं भी हो तुम्हारे बिना सारे काम अधूरे जान पड़ते हैं! [...]

मन की मनमानी….

काव्य सृजन-97 कर लिया मन ने अाज फिर मनमानी! चिर निद्रा [...]

खिलौने का मोह…..

नहीं छोड़ पाया अपने खिलौने का मोह वो बालमन! छीना-झपटी करते [...]

वट सावित्री पूजन….

वट सावित्री... समाज की परिपाटी भी क्या खूब है हम आप मिलकर एक [...]

भारत के वीर जवानों

भारत के वीर- . हे!भारत के वीर जवानों तुम मातृभूमि की रक्षा [...]

सरकारी स्कूलों की व्यथा….

. मास्टर जी विद्यालय में बैठ बच्चों से पंखा झलवा रहे थे खुद [...]

दो किनारे रह गये…

अपनों के लिए हमेशा हारती रही! जीतने का हुनर धीरे-धीरे भूलती [...]

जब भी सुनी बात….

जब भी सुनी बात खुले वातावरण की गाँव की कल्पना मन में उभर [...]

हाइकु.. .

हाइकू- . तुम और मैं कागज की है कश्ती दूर किनारा! . पलकें [...]

प्रभु तुम ध्यान रखना.. .

हम अबोध हम नादान प्रभु तुम ध्यान रखना! . असत्य के मार्ग से [...]

दोहे….

दोहा... . कउन कहै मन के बात, कउन सुनावै तान| मन कैदी होय गा अब,जब [...]

साथ अधूरे थे.. ..

भाव भी गहरे थे राज भी सुनहरे थे बस चेहरे की रंगत फीकी पड़ गयी [...]

धर्मगुरु.. .

धर्मगुरू.......(कहानी) दिन भर की चिलचिलाती धूप के बाद शाम की [...]