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Author: seervi prakash panwar

seervi prakash panwar
Posts 29
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नाम - सीरवी प्रकाश पंवार पिता - श्री बाबूलाल सीरवी माता - श्री मती सुन्दरी देवी जन्म - 5 जुलाई 1997 पता - अटबड़ा, तह-सोजत सिटी, जिला- पाली राजस्थान शिक्षा - इंजीनियरिंग(वर्तमान) रुचि- लेखक(writer) संपर्क - 9982661925 Facebook-www.fb.com/seerviprakashpanwar Blog-www.seerviprakashpanwar.blogspot. com www.ekajeebpal.blogspot.com www.seervibhasha.blogspot.com

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

आख़िरी हम सफ़र…

जो खेल रचा हैं मैने...उसे खत्म करने आया हूँ! जो रूप गढ़ा हैं [...]

ग़ज़ब हो रहा………….

"आखिरकार.... साहब माफ़ करना, सोचने की बात हैं कि, "ग़ज़ब हो रहा [...]

नाजायज़ रहती अग़र माँ……………

"नाजायज़ रहती अग़र माँ तुम तो,वक्त का अहसास नहीं होता, दुध का [...]

” भाषा”

" भाषा" --सीरवी प्रकाश पंवार शरू कहा से करू थोडा [...]

आखिर मेरा लल्ला फिर घर आएगा! उम्मीदों का ताज फिर से पहनाएगा!!

आख़िर मेरा लल्ला फिर घर आएगा! उम्मीदों का ताज फिर से [...]

एक तुम्हारा नाम

तुम जिन्दा रहोगी हर पल इस अज़ीब से रूह में! क्यों कि जिन्दा 'था' [...]

जरूरी नही था

ज़रूरी नहीं था की दुनिया के रंग देखूँ, ज़िगर का टुकड़ा बनाना भी [...]

भूलने को भूल जाता हूँ…

एक जीत है तुझमे की पास खीच ले जाती हैं! कोई बात हैं तुझमे की [...]

वक्त रात पर अड़े

अब काँच पर पत्थर गिरे, फर्क न पड़ता अब जिद को! अब वक्त रात पर [...]

मेरी ज़िद हैं इस…

मेरी ज़िद हैं इस जग़ह के कण-कण में, मै यहाँ कैसे राह बनाऊँ! मै [...]

क़ीमत……

जो घर -घर घूमने वाला आवारा समझा हैं मुझे, क्या यही कीमत थी [...]

हस लेना आज…

हस लेना आज..मेरी परछाईयों पर, तुम जी भर के! आख़िर जिन्दगी की राह [...]

राखी

मै कैसे आऊँ बाहर यहाँ हर कोई इश्क़ में जाया दिखता हैं! कही खोये [...]

दीये की बाती …….

अब उसके बिना जीना दीये की बाती सा लगता! और उसके संग जीना [...]

नेता और सैनिक

साहब, किसी नेता की गाड़ी का काँच तोड़ने से इतना बवाल क्यों मचा [...]

अग़र ना बोली तो…

अग़र ना बोली तेरी हरकतों पर तो मज़ाक समझ लोंगे, मज़बूर हैं तेरे [...]

दिल की ज़मी में खो गयी कही….

शहरों के इन अंधेरों से निकाला तो... परछाईयों में खो गयी [...]

कोई जब रूह गढ़ता हूँ तो…….

कोई जब रूह गढ़ता हूँ तो वो शब्द बन जाता हैं, कोई जब शब्द गढ़ता [...]

“हाऊ मच दिस…

"हाऊ मच दिस... इक दोई चार... ना बेटा, इक दोई चार ना, एक दो तीन [...]

मै इश्क़ विरोधी हूँ….

हम तो उस महफ़िल में ही मर गए थे जहाँ आवाज़ उठाई थी, मेरी उठाई हर [...]

जो दरारों में दिख जाए……

जो दरारों में दिख जाए उससे उम्मीद क्या करना, जो दिलो में दिख [...]

उम्मीद न होंगी…

साहब..... शहर में कुछ अशांति सी दिख रही, कोई बोल रहा था कि.... जो [...]

देश भक्ति

साहब धूर्त हो तुम की बलिदान का कर्ज पैसो से चुकाते हो, पागल [...]

तुम जिन्दा रहोंगीं….

तुम जिन्दा रहोगी हर पल इस अज़ीब से रूह में, क्यों कि जिन्दा हूँ [...]

हमें मंजूर तो है…..

कोई लिख रहा हैं हमकों, हमे मंजूर तो हैं... थोड़े पागल थोड़े मासूम [...]

कुछ पलो की नाराजगी को…

कुछ पलो की नाराजगी से तुम खुद पर दाग मत समझना, जो ना मिलु पल भर [...]

मरहम लगा दे ज़ख्मो पर….

मरहम लगा दे ज़ख्मो पर, तड़प रहा में तेरे लफ्ज़ो पर, एक रूप जड़ा था [...]

ढूंढ़ रहे…

बे वक्त के इन परिंदों को देख़ो....कही आशियाना ढूंढ़ रहे, बे वजह [...]

एक गीत रचा हैं मैने….

एक गीत रचा हैं मैने.... एक गीत रचा हैं मैने........ एक गीत सुना हैं [...]