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Author: Rajesh Kumar Kaurav

Rajesh Kumar Kaurav
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

दुर्गावती की अमर कहानी

गढ़ मंडला राज्य की रानी, नाम दुर्गावती वीर मर्दानी। निर्भीक [...]

झॉसी वाली रानी (बलिदान दिवस )

नाम लक्ष्मी पर दुर्गा थी, मूरत थी स्वाभिमान की।। आज जरूरत [...]

साहित्य की भूमिका

साहित्य देता रहा सदा से, दिशा देश अौर समाज को । साहित्यकार [...]

सच्चा सुख

सुख पाने की चाह में, भटक रहा इन्सान। विरले ही पाते [...]

प्रथम स्वाधीनता समर

प्रथम स्वाधीनता समर अाज भी, घर घर मुँह जवानी है। दस मई सन [...]

कहाँ है वो भारत

कहाँ है वो भारत सोने की चिडि़या। कहाँ वो संस्कृति ललायत थी [...]

कर्म का योग

कर्म रहित जीवन नहीं, जी न सकता कोय। कर्म बन्धन के कारण, जीवन - [...]

आभार नारी का

नारी है सृष्टा की शक्ति, सृष्टि निर्माण की सहभागी। नारी के [...]

सृष्टि

[29/03, 10:49 AM] A S: मना रही सृष्टि अपना जन्म दिन, सृष्टिकर्ता की [...]

ज्ञान ?

सदियों से भटक रहा, ज्ञान की खोज में इंसान। पर मिलता कहाँ [...]

नवरात्र साधना पर्व

आ गया पर्व साधना का, नवरात्रि के नाम से। शक्ति उपासना करके [...]

यह हिन्दुस्तान हैं बेटा

नदी किनारे बैठा, खीचता मिटाता रकील। निराशा से भरा मन, बैचेनी [...]

जीता कौन

नाच और गान में, होली का रंग था। कबीर की वाणी हुर्यारों का संग [...]

विजयश्री

विजयश्री के जश्न में, बजते ढ़लोक और मृदंग । नृत्य गान रंग [...]

हुडदंग ह़ोली की

साहित्यपीडिया परिवार को , होली की शुभकामना। साहित्य संग्रह [...]

बेंटी को उलाहना

बेंटी किसे दूँ उलाहना बता दोषी कौन है। बिगडे़ हालात ससुराल [...]

बेंटियों पर क्या लिखू

बेंटियों पर क्या लिखूँ , लिख चुके हजारों लोग। दें दी सारी [...]

पत्रकारिता ?

पत्रकारिता हो रही बाजारू, कलम बिकती बाजार में। रसूदखोर [...]

युग की पुकार

कवि,स्वयं बना खलनायक, कविता लुटी वाजार में। कामुकता पर चली [...]

युग संदेश

उठों पार्थ,संसय को छोडों, आगें बढ़ अब नाते जोडो़ं। शंखनाद कर [...]

भटकाव

कोयल भटकी अपनी उडा़न में, जा पहुँची कौऔं के गाँव में। ड़री [...]