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Author: Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan
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कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

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मुक्तक (11 Posts)


ना आँखों में मुझे सजाओं.. .

ना आँखों में मुझे सजाओं, मैं काजल सा ठहर जाऊंगा ना बातों में [...]

छलक पड़ती हो तुम कभी.. .

छलक पड़ती हो तुम कभी , एक कशिश छोड़ जाती हो भिगाती बारिशें हैं [...]

वजह तुम हो तन्हाई की.. .

वजह तुम हो तन्हाई की, मेरा त्यौहार तुम ही हो, भले मैं पैर का [...]

मिलता नही कभी भी, जिंदगी में कुछ मुकम्मल..

मिलता नही कभी भी, जिंदगी में कुछ मुकम्मल, कभी पाते भी हो, तो [...]

मिला हूँ जो तुझमे, तो तेरी छवि हो गया हूँ ..

मिला हूँ जो तुझमे, तो तेरी छवि हो गया हूँ ढलते उजालों का जैसे, [...]

फिल्मों वाले अपराधी !

फुटपाथों पर सोने वाले, आज खून के आंसू रोते, समझ गये हैं [...]

चुपके से निखरी रातों में. .

बिन बारिश के मौसम में, तेरा बरसना मुझे याद हैं उन दो कजरारी [...]

बिना मेरे अधूरी तुम..

मेरा हर सुर अधूरा हैं, अधूरी गीत की हर धुन, स्वप्न वो तुम नहीं [...]

कृष्ण मैं भी नहीं, राधा तुम भी नहीं..

कृष्ण मैं भी नहीं, राधा तुम भी नहीं, प्रेम फिर भी इबादत से, कम [...]

तुमसे मिलु मैं कुछ इस तरह…

तुमसे मिलु मैं कुछ इस तरह, की कोई मुझे आवाज़ ना दे, घुल जाउ [...]

ये जीवन भी क्या हैं?

ये जीवन भी क्या हैं, कभी उत्थान तो कभी पतन, कभी गूँज भरी [...]