साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

Author: Nazir Nazar

Nazir Nazar
Posts 24
Total Views 195

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मुझसे कब बात करोगी तुम…..

मन उदास है आज मेरा अजब बेकली है आज तारी लफ्ज़ गूंगे हो गए मेरे [...]

शे’र

मेरे मालिक तिरा मुझपे एहसान है मैं था मिट्टी मुझे कूज़ागर [...]

इंतिज़ार

इंतिज़ार आज फिर मेरी आँखें रौशन हुई जब तेरी यादों के फ़ानूस [...]

राज़ की बातें

रात छत पर टहलते हुए देखे मैंने दो चाँद आपस में बतियाते हुए [...]

मेरा जन्म एक हादिसा

मेरा जन्म एक हादिसा हाँ !! हादिसा ही होगा शायद अगर हादिसा [...]

वही तो लोग ज़माने में हो रहे रौशन

वही तो लोग ज़माने में हो रहे रौशन चराग़ इल्मो-हुनर का जो कर गये [...]

कभी वो बेरुखी करता कभी वो आजिज़ी करता

कभी वो बेरुखी करता कभी वो आजिज़ी करता यही मेरी तमन्ना थी वो [...]

तिरी नाज़-बरदारी कैसे करूँ मैं

दीवाना है तेरा जो प्यासा बहुत है कि फरहाद जंगल में भटका बहुत [...]

मिरा ऐब सबने गिनाया तो होगा

मिरा ऐब सबने गिनाया तो होगा ज़माने ने उत्सव मनाया तो होगा [...]

किताबे-ज़ीस्त का उन्वान हो तुम

किताबे-ज़ीस्त का उन्वान हो तुम मुझे लगता है मेरी जान हो तुम [...]

तुझे अपने घर पे बुलाने से पहले

तुझे अपने घर पे बुलाने से पहले सजा लूँ ये कमरा दिखाने से पहले [...]

काम आ ही गई बंदगी दोस्तों

काम आ ही गई बंदगी दोस्तों ज़िंदगी खुशनुमा हो गयी दोस्तों [...]

बता रहा है मिरे ऐब को हुनर मेरा

रिवाज देश का मेरे ज़रा निराला है ज़मीर बेचने वालों के घर उजाला [...]

बताये क्या तुम्हें क्या क्या हमारे घर नहीं होता

बताये क्या तुम्हें क्या क्या हमारे घर नहीं होता वो हम जो [...]

हमें उनसे मुहब्बत हो रही है

हमें उनसे मुहब्बत हो रही है ज़मीने-दिल भी जन्नत हो रही [...]

गले का हार होना चाहता हूँ

गले का हार होना चाहता हूँ मैं उसका प्यार होना चाहता [...]

आप हमसे यूँ मिले है शह्र में

आप हमसे यूँ मिले है शह्र में गुल ही गुल के सिलसिले है शह्र [...]

फिर दिये सा जगमगाना ज़िंदगी

फिर दिये सा जगमगाना ज़िंदगी ख्वाहिशों का ताना-बाना [...]

बयान ए क़लम

क्या लिखूं कैसे लिखूं मैं एक विश्वास लिखना चाहती हूँ काल के [...]

जीत कर भी फिर से हारी जिंदगी

जीत कर भी फिर से हारी ज़िंदगी पूछिए मत क्यूँ गुजारी ज़िंदगी [...]

अगर वो हादिसा फिर से हुआ तो !!!

अगर वो हादिसा फिर से हुआ तो मैं तेरे इश्क में फिर पड़ गया तो [...]

किया तुमने भी है कल रतजगा क्या ?

किया तुमने भी है कल रतजगा क्या तुम्हें भी इश्क़ हमसे हो गया [...]

अंतर्मन में जब बलवा हो जाता है

अंतर्मन में जब बलवा हो जाता है रो लेता हूँ मन हल्का हो जाता [...]

वो शे’र सुन के मिरा हो गया दिवाना क्या

वो शे’र सुन के मिरा हो गया दिवाना क्या मैं सच कहूँगा तो [...]