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Author: Jitendra Dixit

Jitendra Dixit
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कविता मेरे लिये एक रिश्ता हैं जो मेरे और आप के दरमियाँ हैं। अपना दर्द अपनी खुशी अपनी आवाज आप तक पहुचाने के लिए लिखता हूं।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

क्या क्या ढूढ़ता हूँ

किताबों को पढ़ना छोड ही दिया है, टीवी के चेनलों मे शुंकु ढूढ़ता [...]

अदभुत है बिटिया

दिनभर की थकान एक पल मैं हटा देती है, दौड़ कर अपना लॉलीपॉप मुझे [...]

छोड़े अंधविश्वास

एक न्यायाधीश प्रकरण सुलझा गया, आस्था के सामने विवेक मुरझा [...]

सामान समझते है

उन्हें देख मजबूरी मै मुश्कुरते हैं लोग, वो उसे ही अपना [...]

बेटों को भी संश्कार देते

ना कमा के खाने देते , ना मुशीबतों मैं उधार देतें. दोस्ती ने [...]