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Author: guru saxena

guru saxena
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ब्रज की रज

सवैया (ब्रज की रज) ब्रज के वन बाग तड़ाग हैं धन्य जहाँ जन्मे [...]

रानी अवंती बाई

रानी अवंतीबाई को श्रद्धांजलि दुर्गा जैसी उतरी रण में रखा [...]

जरा बतिया ले

सवैया छंद आदमी कि नहिं गैस मिटे चहे बीस प्रकार की औषधि खा ले [...]

हिमालय

कुंदलता सवैया ( 8 सगण 2 लघु) चलते नित हैं सत् के पथ में, फिर हो [...]