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Author: Dr. umesh chandra srivastava

Dr. umesh chandra srivastava
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Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India

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कविता (10 Posts)


अश्रुनाद

. .... मुक्तक .... सावन बदली जब आती तब विरह रागिनी गाती [...]

गीत …

.... जीवन की दुखद अनुभूति .... ॥ अनुज-व्यथा ॥ कुछ कही अनकही [...]

…… गीत ….

.. .... गीत .... देखकर फिर सघन जलधर , विकल बरसे नयन झर- [...]

पत्नी पीड़ित ऐ! भद्र जनों

पत्नी पीड़ित ऐ ! भद्र जनों मेरी सलाह को अपनाओ यदि जीवन सुखद [...]

देख कर फिर सघन जलधर

देखकर फिर सघन जलधर विकल बरसे नयन झर-झृर सूखते से पादपों [...]

…. पद …2

भगवन ! कैसे दर्शन पाऊँ ? तीरथ चारो धाम गया जा , सागर गंग नहाऊँ [...]

मधुर-मधुर मन्द-मन्द

मधुर-मधुर मन्द-मन्द , मोहन मुस्काये मोर मुकुट तिलक भाल [...]

……साहस अभाव…..

साहस अभाव में सुजनों के , दुष्टों का साहस पलता है । हों असुर [...]

….. .. पद ……

भगवन!क्यों नहिं दर्शन पाऊँ । योग मंत्र श्रुति ग्रन्थ न जानू , [...]

धरती पुलकित हो उठे आज

धरती पुलकित हो उठे आज जगती का दुःख हरना होगा । इस कर्म-भूमि [...]