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Author: Deepshika Sagar

Deepshika Sagar
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Poetry is my life

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

दोहे

सागर प्यासा ही रहा, पी पी सरिता नीर, कैसी अनबुझ है तृषा, कैसी [...]

मुक्तक

निशाने पर सदा बिजली के रहता आशियाना है, ख़ुशी की ख़ुदकुशी का भी [...]

मुक्तक

-चार मिसरे- डूबता है दिल सफीना, दर्द की बरसात में, खून ही टपका [...]

अन्य

कलाधर छंद-लय -मनहरण घनाक्षरी नैन में लिए उजास, मन्द मन्द है [...]

दोहे

चैन अमन के फूल अब, चमन करें गुलजार, मिलकर हम सब ही करें, हिंसा [...]

अन्य

घनाक्षरी -सभी स्नेही मित्रों को सादर नमन- छम छम बरसात, झूमते [...]

ग़ज़ल

कब किसी के कहे से रुकी ज़िन्दगी, छलछलाती नदी सी बही [...]

दोहे

शब्द शब्द मुखरित हुआ, छंद छंद नव गीत, मन वीणा बजने लगी, [...]

मुक्तक

बुलन्दी की शिखा तक मैं, शिखा बन आस की चलती, नयन में या किसी के [...]

मुक्तक

छलका छलका एक समन्दर आँखों में, टूटे ख्वाबों का हर मंज़र आँखों [...]

ग़ज़ल

हमसफ़र है न हमनवा अपना, बस सफर में है काफिला अपना। मुख्तलिफ [...]

ग़ज़ल

दर्द को अब मुँह चिढ़ाना आ गया, आसुंओं में मुस्कुराना आ [...]

अन्य

भोर का सुहाना चित्र रक्तिम आभा ले उगता है, प्राची में [...]

मुक्तक

प्रणय में इम्तिहानों का सदा ही दौर चलता है, सदा ही डूब दिल बस [...]

कुण्डलिया

बिन मोबाइल हाथ में, रहे न ऊंची शान, जपूँ फेस बुक रोज मैं, [...]

मुक्तक

मेरा दूसरा मुक्तक- अन्याय हँसे खुलकर, ये न्याय अदालत [...]

ग़ज़ल

आँखो से ही कह दो जानम, गुप् चुप ही इक़रार करो, हमने कब ये माँगा [...]

मुक्तक

उडी है नींद आँखों से, हुआ अब चैन भी है गुम, चमन में आज दिल के, [...]

अन्य

एक त्वरित प्रयास- कविता का यही प्यार,सृजन का है खुमार, मंच ये [...]

मुक्तक

मान सम्मान से नही डरता, खतरा ए जान से नही डरता। तैर के दरिया [...]

मुक्तक

हर कली सहमी हुई, गायब हुई हैं शोखियाँ, चल पड़ी हैं आग लेकर, जाने [...]

गज़ल

अहसास के फलक पर, चाहत की बदलियाँ हैं, दिल के चमन में उड़ती, [...]

ग़ज़ल

ए मुहब्बत ज़रा करम कर दे, इश्क़ को मेरे मोहतरम कर दे। कर अता [...]