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رَہے ہَمیشَہ اَجْنَبی

رَہے ہَمیشَہ اَجْنَبی،
کبھی نہ ہوئے عام
وزیر اعظم ہی رہے،
پہنچے نا پیغام

•••

रहे हमेशा अजनबी
कभी न होते आम
वज़ीर आज़म ही रहे
पहुँचे ना पैग़ाम

***

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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार Books: इक्यावन रोमांटिक ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); 'इक्यावन इन्द्रधनुषी ग़ज़लें' (ग़ज़ल संग्रह) प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); रामभक्त शिव (संक्षिप्त…

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