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3 Apr 2023 · 1 min read

Tufan ki pahle ki khamoshi ka andesha mujhe hone hi laga th

Tufan ki pahle ki khamoshi ka andesha mujhe hone hi laga tha,
Ki darwaje par der rat ek dastak hui .
Musafir ke bhesh me kali jatao me samuche sansar ki khabar liye akash ko chhuti ek pratima ka aagman hua.
Ashcharya si mai khadi uske vishal kaya ko niharne lagi,
Tbhi uske bitar se ek awaj ke bisfot kiya ,
Mai tumhara aane wala kal hu
Jb tum mere swagat me itni der lagaogi to tumhare apne tumhare iss rup ki kya swagat krenge .
Mai man hi man sochne lagi ki kya ye mai hi hu, tbhi meri najar uski thaki aakho par padi ,
Uski kamjor bajuyo par padi jo kbhi pure sansar ka bojh uthaya karti thi , ajj khud ka bojh uthane me ashmarth thi .
Uski sukhi virksha ke bhati nishkriya sharir ab aur chalne ke kabil na bacha tha.
Maine gahri soch ke bad ye aakalan kiya ki kya mera budhapa bhi itna hi bhayanak hoga.
Jisne sbko rotiya di kya usko koi rotiya dega.
Mai hairan , preshan , nishabd khadi bus usko niharti rahi

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