Posts Tag: प्रेम 149 posts Sort by: Latest Likes Views List Grid Dhirendra Panchal 28 Nov 2025 · 1 min read अच्छी बात नहीं दिल से दिल के तार छुड़ाना अच्छी बात नहीं । सूरज पर प्रतिबन्ध लगाना अच्छी बात नहीं । तुमने चंचल राग सुनाया पर मेरी भी बात सुनो , व्याकुल मन... Hindi · कविता · ग़ज़ल · प्रेम 30 Share Dhirendra Panchal 20 Nov 2025 · 1 min read त का घाटा मेहरारू से बड़ा मनउली देवता पित्तर । मेहरी चाही हमें पवित्तर । हमरो सपना साच भइल बा । पूरा मोर बनवास भइल बा । बहुते सपना जोड़ले बानी । मन क सिकहर... Bhojpuri · कविता · प्रेम · हास्य 38 Share Dhirendra Panchal 19 Nov 2025 · 1 min read भटक रहे हैं लड़के अब भौकाल मचाने वाले भटक रहे हैं लड़के अब भौकाल मचाने वाले । काजल देख के उन आँखों का हाल बताने वाले । गांव की पगडण्डी से लेकर शहरों की फूलवारी तक, सिंच रहे... Hindi · कविता · प्रेम · लड़के · समाज 42 Share Dhirendra Panchal 14 Nov 2025 · 1 min read सोना सुग्गु जान करेजा बात प्यार क हमके ओकर तनिको समझ न आवे सोना सुग्गु जान करेजा कही कही के बतियावे हम जानित है अपने मन से छुवल चाहत हे अपने मन क सबरे... Bhojpuri · कविता · प्रेम · रिश्ता 224 Share Dhirendra Panchal 11 Nov 2025 · 1 min read इक देवी ने इस दिल को देवालय कर डाला मैंने अपनी जान हथेली पर उसके कर डाला इक देवी ने इस दिल को देवालय कर डाला काश की मिल पाता मैं उनसे हाल दिलों के गाता काश की इस... Hindi · कविता · प्रेम · प्रेमिका 59 Share विशाल शुक्ल 20 Oct 2025 · 1 min read प्रेम सीता के संग संग राम, राम के संग संग सीता ! प्रेम का बंधन था ऐसा, वरना कौन यहां जीता !! श्रद्धा समर्पण त्याग की, रीति कुछ ऐसी बीती !... Hindi · प्रेम 149 Share Mahesh Jain 'Jyoti' 13 Oct 2025 · 1 min read कुण्डलिया छंद !! श्रीं !! सुप्रभात ! जय श्री राधेकृष्ण ! शुभ हो आज का दिन ! 🙏 पावन है अति प्रेम का, भाव ईश सा जान। बसे प्रेम जिनके हृदय, होते... Hindi · कुण्डलिया · प्रेम 73 Share विशाल शुक्ल 4 Aug 2025 · 1 min read प्रेम गीत हाथों में उनके बबूल पाया ! वफा के घाव में शूल पाया !! रहे दर्द में कुछ आराम मेरे ! मैने गीत प्रेम के खूब गाया !! *• विशाल शुक्ल* Hindi · प्रेम 148 Share Dhirendra Panchal 24 Jun 2025 · 1 min read माफ हमको कीजिये इस विलासी भावना से साफ दिल को कीजिये । प्रेम अगर सम्भोग है तो माफ हमको कीजिये । होटलों के फर्श तक हम बेहयाई लाँघकर । बण्डलों पर नोट के... Hindi · कविता · गीत · प्रेम 137 Share Dhirendra Panchal 18 Jun 2025 · 1 min read पत्र पत्र देकर हे प्रिये तुम क्यों सशंकित कर रहे हो? श्वास पर संवेदना का भार अंकित कर रहे हो लेखनी पहचानती हूँ अक्षरों में बोध तेरा बस यही बाकी बचा... Hindi · कविता · गीत · प्रेम 67 Share Page 1 Next