Posts Tag: नवगीत 76 posts Sort by: Latest Likes Views List Grid *प्रणय प्रभात* 28 Sep 2025 · 1 min read #नवगीत... #नवगीत... *सोचो, समझो और बताओ।।* *यदि स्वाभिमानी हो तो।* *(प्रणय प्रभात)* * जिसने दी है चोंच, उसी को देने हैं दाने। महाभिक्षुओं को मन पंछी दाता क्यों माने?? *अपने पर... Hindi · नवगीत · प्रणय के गीत 1 82 Share Dinesh Kushbhuvanpuri 20 Sep 2025 · 1 min read नवगीत:- सपनों की चादर *मन के भाव तुम्हारे पढ़कर, मुझे खुशी होगी। चाहत के किस्सों को गढ़कर, मुझे खुशी होगी॥ नित चाहत के चौराहे पर, प्रेम खड़ा होगा। शब्दों का सुरताल समझकर, अर्थ बड़ा... Hindi · नवगीत 1 78 Share Dinesh Kushbhuvanpuri 15 Sep 2025 · 1 min read नवगीत:- मन का पंछी मन का पंछी रात रात भर, परछाईं बोये। और पड़ी चुपचाप बेबसी चौखट पर रोये॥ मेघ खड़े झंझावातों के, नीर बहाने को। उर में उठे बवंडर भारी, नींद उड़ाने को।... नवगीत 1 84 Share *प्रणय प्रभात* 1 Sep 2025 · 1 min read #नवगीत- #नवगीत- ■ मेरे पीछे ना दौड़ो...।। 【प्रणय प्रभात】 *मैं बादल हूँ बस धरती की प्यास बुझाऊंगा। मेरे पीछे ना दौड़ो मैं हाथ न आऊंगा।। - मुझमें जितना नीर, वो सब... Hindi · नवगीत · प्रणय के गीत 1 104 Share Dinesh Kushbhuvanpuri 9 Jul 2025 · 1 min read नवगीत: श्वांसें करें हवन मोहपाश में बँधी आत्मा, कैसे करे भजन। भावों की आहुतियाँ देकर श्वांसें करें हवन॥ अहंकार की हर आहट पर, मन का रहे दखल। नित लालच की मृगतृष्णा में, गाता पाप... Hindi · नवगीत 1 124 Share डाॅ. बिपिन पाण्डेय 10 Nov 2024 · 1 min read नवगीत काट रही है भूख चिकोटी। दूध नहीं है छाती में पर चिपकी मुनिया छोटी। देख रही है दुनिया सारी केवल अल्हड़ यौवन, कामी बनकर घूरें नजरें बना ज़माना दुश्मन। हमने... Hindi · नवगीत 203 Share surenderpal vaidya 9 Nov 2024 · 1 min read महका है आंगन ** नवगीत ** ~~ हार सिंगार के फूलों से, महका है आंगन। देख लीजिए हुआ प्रफुल्लित, खिला खिला सा मन। खिले रात भर महके महके सब शाखाओं पर नित्य सुबह... Hindi · नवगीत · हार सिंगार 1 1 198 Share surenderpal vaidya 4 Nov 2024 · 1 min read रंग अलग है नवगीत ~~ रंग अलग है ढंग अलग है। बीत रहे हर पल जीवन के। बारिश की बूंदाबांदी में, देखो भीग रही धरती है। लोगों के तन मन पर भी तो,... Hindi · नवगीत 1 1 186 Share जगदीश शर्मा सहज 10 Jun 2024 · 1 min read श्यामा चिड़िया तरुवर पर भोली सी चिड़िया, उड़-उड़कर कुछ कहती है। सूने पेड़ों की डाली पर, सूखे कण्ठ फुदकती है।। ढूँढा करती है वो छाया, कांटों के झंखाड़ तले। शहरों के काले... Hindi · नवगीत 1 286 Share Shyam Vashishtha 'शाहिद' 13 May 2024 · 1 min read सारा जीवन बीत गया है! आधा धीरज रख कर बीता आधा मारामारी में, सारा जीवन बीत गया है जीने की तैय्यारी में ! रोज़ चले पर कहीं न पहुँचे ऎसी डगर मिली हमको सपनों में... Poetry Writing Challenge-3 · नवगीत 2 210 Share Page 1 Next