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संस्कृतम् शरणं गच्छामि

हे मित्रम, संस्कृतम् शरणं गच्छामि सर्वदा!
हे मित्रम, संस्कृतिं शरणं गच्छामि सर्वदा!!
हे मित्रम, राष्ट्रगौरवं शरणं गच्छामि सर्वदा!!!

***
____________________
हिन्दी भावार्थ: —
हे मित्र, संस्कृत की शरण लेता हूँ सदा !
हे मित्र, संस्कृति की शरण लेता हूँ सदा !!
हे मित्र, राष्ट्रगौरव की शरण लेता हूँ सदा !!!

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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार Books: इक्यावन रोमांटिक ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); 'इक्यावन इन्द्रधनुषी ग़ज़लें' (ग़ज़ल संग्रह) प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); रामभक्त शिव (संक्षिप्त…

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