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प्रवाहिता मन्दाकिनी

सुख-दु:ख रूपम वाहिनी
प्रधानम् महामोक्ष मम
प्रवाहिता मन्दाकिनी
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*तीन पंक्तियों में रचा जनक छन्द। सबसे सहज प्रवाह के लिए जाना जाता है। यह दोहे के प्रथम चरण (13 मात्राओं) के तीन सममात्रिक चरणों का छंद है। 11वीं मात्रा अनिवार्य रूप से तीनों चरणों में लघु रहेगी।

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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार Books: इक्यावन रोमांटिक ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); 'इक्यावन इन्द्रधनुषी ग़ज़लें' (ग़ज़ल संग्रह) प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); रामभक्त शिव (संक्षिप्त…

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