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नीतिश्लोके

*नीति श्लोके*

भारभूता भवत्युर्वी भ्रष्टाचारेण भूतभिः।
सज्जनानामतिशये अक्लेशमनुभूयति।।

क्षुद्रो राजा शठा मंत्री, स्वार्थलिप्तो प्रजा तथा।
तस्मिन् देशे न उत्थानो, न श्रेयश्च न कीर्तिरपि।

अंकित शर्मा ‘इषुप्रिय’

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कार्य- अध्ययन (स्नातकोत्तर) पता- रामपुर कलाँ,सबलगढ, जिला- मुरैना(म.प्र.)/ पिनकोड-476229 मो-08827040078

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