Sûrëkhâ Tag: ओ माँ 1 post Sort by: Latest Likes Views List Grid Sûrëkhâ 8 May 2024 · 1 min read बूढ़ी मां बूढ़ी मां जब सांसे मेरी चलती थी तो तेरा रवैया कुछ और था एक रोटी के टुकड़े के खातिर तूने दिया मुझे झंझोड़ था। एक गिलास पानी पिलाने के कारण... Poetry Writing Challenge-3 · ओ माँ · कविता · बुढ़ापा · समय का चक्र 1 114 Share