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6 Apr 2017 · 1 min read

आशा

आशा

आशा, संकल्प, श्रद्धा, ज्ञान का कर वरण
तिमिर ने ओढा शुभ्र वितान
आ रहा अब अलौकिक,दिव्य विहान
संवेदना का किरीट,स्वर्णरश्मि का दिव्य ज्ञान
प्रशस्त है नव दिशा, नूतन आयाम
प्रमाद, द्वेष नानृत की भर्त्सना करूँ
मृदुल भावनाओं, आकांक्षाओं, संवेदनाओं की
सर्जना करूँ
निर्झर,निर्मल,मृदुल कल्पनाओं के परों पर लक्ष्य को साकार करूँ
तमस, नैराश्य से निस्सरित जीवन का श्वास भरूँ
तारक-खंचित, रजत रचित प्रारब्ध की कल्पना करूँ
जर्जर,क्षीण,क्षुधातुर प्राणीआशा की ज्योति से कर्म रत हो
संकल्पवान प्राणी दृढनिश्चय में आबद्ध हो
आशा की साधना करूँ,पुरुषार्थ की वन्दना करूँ
संस्कार,सभ्यता,श्रद्धा की मंगलकामना करूँ
सर्वहिताय आरोग्य-निरोग की प्रार्थना करूँ
आशा, उत्स जीवन मरुभूमि की साहस संयम का अलख प्रज्ज्वलित कर सकारात्मक लक्ष्य की कामना करूँ
अपरिसीम संवेदनाओं संभावनाओं के कपाट खोल दूँ
इन्द्रियों के वातायन को अंतस की असीमता से जोड़ दूँ
आशा को शक्ति का उपहार अनमोल दूँ
जीवन को सृजन की भक्ति बोल दूँ

सुनील पुष्करणा

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