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5 Apr 2017 · 1 min read

कुछ दोहे से

?कुछ दोहे से?

एक जैसे भावों की,
नकल टीपतेे लोग|
फेसबुकी कविता हुई,
ज्यों संक्रामक रोग||1||

निराला औ’ दिनकर सी,
ढूँढ़ कलम मत आज|
अंगूठे से लिख रहा
ज्ञानी हुआ समाज||2||

तुलसी सूर कबीर हों,
सबकी कहाँ बिसात|
करें कठिन बस साधना,
हृदय लिये जज्बात||3||

✍हेमा तिवारी भट्ट✍

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