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4 Apr 2017 · 1 min read

रंगीला फागुन

रंगीला फागुन आ गयो,
री सखी! फागुन आ गयो;
मोरा जिया रा यूँ हरसा गयो…
री सखी! फागुन आ गयो।

चलै है बयार घुली-घुली जाए रंग जू,
चलूँ सूँ मटकती चाल पिया संग जू;
मोहे मन मा हुलास आ गयो।
री सखी! फागुन आ गयो………..

लद-कद टेसू बगिया म्हारी,
आओ री नाचै हिल-मिल सारी;
मोहे फागुन मनवा भा गयो।
री सखी! फागुन आ गयो……….

अमुआ की डलिया जाई रे बौराए,
फाग उमाह सर चढ़ता जाए;
म्हारो देवर गुलाल लगा गयो।
री सखी! फागुन आ गयो………

गेहूँ की बालियाँ हुई रै सुनहरी,
चढै़ रै सूरजवा भरी रै दुपहरी;
अरै मौसमवा पलटी खा गयो।
री सखी! फागुन आ गयो…..

रंगीला फागुन आ गयो,
री सखी! फागुन आ गयो।
सोनू हंस

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