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4 Apr 2017 · 1 min read

श्याम और राधा (प्रथम बार)

देखत नैना श्याम के, राधा है हरषाय।
ऐसे मंजुल सुमन तो, मानस* भी नहिं पाय॥
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हिरदय में हिलोर रही, प्रेम लहरें अपार।
वृषभानुजा पूछ रही, कान्हा कौन कुमार॥
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मनहर छवि को देखकर, राधा गई लजाय।
मोहन मानो काम सम, धीरज रही गँवाय॥
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अनुपम मेरे श्याम हैं, राधा मोहे रूप।
मेरे भव बंधन तजो, सगरे जग के भूप॥
सोनू हंस

*मानस- मानसरोवर झील

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