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2 Apr 2017 · 1 min read

दादाजी की राय

होती हैं कुछ दिक्कते,जिनका नही उपाय!
कर जाती है काम तब ,दादाजी की राय!!

महके उनका इत्र बिन,साहित्यिक परिवेश !
आती है किरदार से,जिनके महक रमेश !!

होती जब नित आपकी,रहमत की बरसात!
मांगू क्या प्रभु आपसे,..कोई अब सौगात !!

ख़त्म रसोई में हुआ , खाना जितनी बार !
माँ ने फांका कर लिया, झूठी मार डकार !!
रमेश शर्मा.

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