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2 Apr 2017 · 1 min read

समल चित् -समान है/प्रीतिरूपी मालिकी/ हिंद प्रीति-गान बन

(1)
समल चित् -समान है
………………………
सजगताभिमान है।
सुबुधि गह महान है।
भाव बिन सदैव नर।
समल चित्-समान है।

चित्=चित्त

(2)
प्रीतिरूपी मालिकी
…………………….
ईश-पथ का जाम पी,
बनो ज्ञान -पालकी।
मिलेगी सहज सुबुद्धि-
प्रीतिरूपी मालिकी।

(3)
हिंद-प्रीति-गान बन
……………………
जनम भूमि मान बन।
अहं–छोड़, ध्यान बन।
“नायक” सुदिव्य-विज्ञ,
हिंद-प्रीति-गान बन।

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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