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26 Mar 2017 · 1 min read

लौट के आ जाओ तुम

लौट के आ जाओ तुम मुझपर ये रहम कर दो
मुश्किलहै तुम बिन जीना नजर एकइधर कर दो

ना धड़कन चलती है हुई सांसे भी मद्धम
चुप रह कर देख लिया घुटता जाता है दम
झलक एक दिखाकर मुझपे अहसान जरा कर दो

खुश रहता हूँ मैं तब होती हो जब तुम संग
अब भूल गया जीना हुई जिन्दगी भी बेरंग
कहीं जल ना जाए ये तन मिलकर शीतल कर दो

तुम रहती हो जब पास मन फूल सा खिलता है
बिन तेरे सावन भी मुझे पतझड़ लगता है
ले जाओ तुम जान मेरी कम बोझ मेरा कर दो

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