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25 Mar 2017 · 1 min read

वक्त आ गया है जबाव का

वक्त आ गया है, जब़ाब का ।

हुए बहुत दिन घिसते-पिसते ,
वेईमानी का जीवन जीते ।
अब यह ढर्रा नहीं चलेगा ,
सही माल ही यहाँ गलेगा ।
लेख-जोख होगा हिसाब का ।
वक्त आ गया है जब़ाब का ।

अभी और कुछ दिन तुम कर लो,
उल्टा-सीधा अपना काम ।
आगे की फिर ख़ैर नहीं है ,
आगे की फिर जाने राम ।
अनावरण कर दो नक़ाब का ।
वक्त आ गया है जब़ाब का ।
-ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
कवि एवं शिक्षक ।

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