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25 Mar 2017 · 1 min read

नारी (घनाक्षरी)

उसे अब न सताओ, और अब न रुलाओ,
बताओ न कमजोर, अबला न कहिये।।

जाग गई है ये नारी, अब नारी न बेचारी।
दुनिया की गाड़ी के दो, नर-नारी पहिये।।

पढ़-लिख ज्ञान पाती, काम करती कमाती,
सीमा में भी कम नहीं, नारी को समझिये।।

चली मिला के कदम, तोड़ दुनिया के भ्रम,
छल न करो ‘कौशल’, मान सदा रखिये।।

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