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18 Mar 2017 · 1 min read

** चलन है प्यार में रुसवाई का ***

पिघलती है बर्फ तो पिघलने दे
सुलगती है आग तो सुलगने दे
दिल पिघले तो कुछ बने बात
जज़्बात बहके तो बहकने दे ।।

सिलसिला मुहब्बत का चलने दे
शामेउम्र का क्या,अब ढलने दे
चलन है प्यार में रुसवाई का
अरमान कुछ दिल में पलने दे ।।
?मधुप बैरागी

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