Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
16 Mar 2017 · 1 min read

मुक्तक

कई बार वक्त का मैं निशान देखता हूँ!
कई बार मंजिलों का श्मशान देखता हूँ!
दर्द की दहलीज पर बिखरा हूँ बार-बार,
कई बार सब्र का इम्तिहान देखता हूँ!

मुक्तककार- #महादेव’

Loading...