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12 Mar 2017 · 1 min read

होली

चली फागुनी बयार बावरा मन हुआ तैयार
शोर शराबा हल्लम हुल्ला ढप गीत धमाल
गली गली

पिचकारी की धार गुब्बारे की मार
छुपते छुपाते बचता हर कोई रंग जाने से
गली गली

भांग मिली ठंडाई गुज़िया और मिठाई
बाजार लगा है खरीदे हर कोई
गली गली

कही है बच्चो का झुण्ड कही है लोग लुगाई
होलिका दहन की परंपरा की मंगल बेला आई
भक्त प्रहलाद की जय जय गूँजे हरबार
गली गली

उड़े धरती का गुलाल रंग गया नील गगन
दशों दिशाये खेले होली होकर के मगन
गली गली

होलिकोत्सव की इंद्र धनुषी शुभकामनाएं
सुख सफलता खुशिया सन्देश पहुँचे
गली गली

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