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9 Mar 2017 · 1 min read

अरमान पूरे हुए दिल के

मेरी कलम से…….(संजय)

” अरमान पूरे हुए दिल के ”

एक मुद्दत के बाद एक लम्हा मिला,
जिसमें ख्वाबों को सजाने का मौका मिला ।
धड़कते दिल को सीने में दबाये,
हम एकदूजे के सामने आए…।।
एक मदहोशी सी छाने लगी,
धड़कनें बेकाबू हो जाने लगी ।
उनकी मदमस्त आँखों में प्यार बेशुमार था,
ढलती दोपहर में जवानी का खुमार था ।।
कदम बरबस ही उनकी ओर बढ़ने लगे,
मन में आशाओं के दीप जलने लगे ।
सांसे तीव्रता दिखाने लगी,
समय की रफ्तार थम सी जाने लगी ।।
ज्यों ही बाहें फैलायी मैंने मोहब्बत को आगोश में लेने के लिए,
वो शरमा कर मेरे आगोश में समाने लगी ।
वक़्त कम था और ख्वाब ज्यादा,
मगर पुरे तो आखिर करने थे ।
प्यार की नदिया में मिल गए,
जो अरमानों के कल कल बहते झरने थे ।।
मधुर सुगंध फैली थी फिज़ा में,
शीतल मन्द मन्द बहती पवन थी ।
जज़्बात आज खामोश थे,
मगर नैन कुछ कह रहे थे ।।
दिल का मयूर झूम रहा था,
और भंवरे गुनगुना रहे थे ।।।
यादों का महल बनकर ये लम्हा,
यूँ ही दिल में समाया रहेगा ।
रंग गया हूँ उनके रंग में पूरा अब तो,
यूँ ही मस्ती का आलम छाया रहेगा ।।

रचनाकार
कवि संजय गुप्ता
मोगीनन्द (नाहन)
जिला सिरमौर (हि0प्र0)

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