Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
9 Mar 2017 · 1 min read

हुडदंग ह़ोली की

साहित्यपीडिया परिवार को ,
होली की शुभकामना।
साहित्य संग्रह कर इतिहास रचा,
कर चुनौतियों का सामना।
रंग बिरंगी कविताओं को,
आश्रय दिया गया है।
अनगढ़ रचनाकारो को भी,
श्रैष्ट कवियों मे चुना है।
कलम रूपी पिचकारी से,
कविता को लगा रहें कालिख,
रंगीले कवियों की टोली,
न कोई मूर्ख न कोई लायक।
है जो हिन्दी में कच्चे,
पढ़ नहीं पाते क्या लिखा,
शरमाती कविता को,
उन्हीं का रहा रंग चोखा।
वेटी पर लिखने साहित्य,
हजारो हाथ मचल गये।
होली की हुडदंग जैसी,
फुहड रचनायें भर गये।
व्हूज पाने बना बना टोली,
अंको को खूव बढा़या।
नालायक से लायक करने,
पीडिया को भी खूब छकाया।
जो वने श्रेष्ट पुरुष्कार मिला,
उन्हें बहुत बहुत बधाई।
जो छूट गये लिखते चले,
होली आयी है होली आयी।
अब बचा नही कोई सा रंग,
तोडी सारी लाज शरम।
होली पर और क्या कहें,
सारे कवि है वेशरम।

Loading...