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7 Mar 2017 · 1 min read

उदास चाँद

आसमाँ पर उदास बैठा चाँद
रात भर तारे गिनता रहता है
चाहता है के झुक के धरती की
चूम ले ये चमकती पेशानी
और हसरत निकाल ले दिल की
कौन समझाए पर दीवाने को
ख्वाहिशें हसरतें जो हैं दिल की
ख्वाहिशें हसरतें ही रहती हैं
ख्वाशों पर चला है बस किस का
हसरतें किस को रास आयीं हैं।

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