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6 Mar 2017 · 1 min read

टपकेगी जब आरजू

टपकेगी जब आरजू, नैनो से बन बूंद !
लेना ही तब ठीक है,आँखे अपनी मूंद !!

जीना सीखा भी नही,हमने अभी रमेश !
मरने का देने लगे, वो हमको उपदेश !!

सच्चाई होती नही,…दरिया को स्वीकार !
मैने उसको कर लिया,सही सलामत पार !!
रमेश शर्मा.

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