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5 Mar 2017 · 1 min read

मुक्तक

दिन गुजर गया है मगर शाम बाकी है!
तेरी #आरजू का पैगाम बाकी है!
सैलाब आ गया है यादों का लेकिन,
तेरे दर्द का अभी सलाम बाकी है!

#महादेव_की_कविताऐं'(22)

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